कोलकाता में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ 15वां पूर्वक्षेत्रीय युवा महोत्सव (जोन–4), संस्कृत, संस्कृति और एकता का उत्सव
कोलकाता, 8 जनवरी 2026: केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संरक्षण में श्री सीताराम वैदिक आदर्श संस्कृत महाविद्यालय द्वारा आयोजित 15वां पूर्वक्षेत्रीय युवा महोत्सव (जोन–4) 2025–26 का सफल समापन हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, आनंदपुर, कोलकाता में हुआ। 6 से 8 जनवरी 2026 तक चले इस तीन दिवसीय महोत्सव ने संस्कृत अध्ययन, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और युवा प्रतिभा का सशक्त संगम प्रस्तुत किया।
“संस्कृतेन संस्कारः, संस्कारेण भारतम्” (संस्कृत से संस्कार, संस्कार से भारत का उत्थान) इस प्रेरक सूत्रवाक्य तथा “परंपरा, प्रतिभा और एकता का संगम” विषयवस्तु के साथ आयोजित इस महोत्सव ने युवा संस्कृत विद्यार्थियों को शैक्षणिक, सांस्कृतिक और क्रीड़ात्मक गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का व्यापक मंच प्रदान किया।
बिहार, ओडिशा, मणिपुर, त्रिपुरा, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आए विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक और खेल प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया। महोत्सव में पूर्वी भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर का सजीव प्रदर्शन हुआ—बिहार की विद्वत परंपरा, ओडिशा की शास्त्रीय कलाएं, मणिपुर के मनोहारी नृत्य, झारखंड की लोकसंस्कृति, त्रिपुरा की रंगीन विरासत और पश्चिम बंगाल की समृद्ध साहित्यिक एवं संगीत परंपरा।

उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और अनुशासित मार्च-पास्ट के साथ हुआ, जो परंपरा और भविष्य की आकांक्षाओं का प्रतीक बना। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, कुलपति, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली; प्रो. एस. सुब्रह्मण्य शर्मा, अध्यक्ष, श्री सीताराम वैदिक आदर्श संस्कृत महाविद्यालय; श्री हरि कृष्ण चौधरी, अध्यक्ष, हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस; डॉ. सोमेश कुमार मिश्रा, प्राचार्य, आयोजक संस्था; तथा स्वामी आत्मप्रियानंद, प्रो-चांसलर, रामकृष्ण मिशन विवेकानंद शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान उपस्थित रहे। वक्ताओं ने युवाओं में नैतिक मूल्यों, बौद्धिक गहराई और सांस्कृतिक सौहार्द के निर्माण में संस्कृत की भूमिका पर प्रकाश डाला।
तीन दिनों तक महोत्सव परिसर खो-खो, कबड्डी, वॉलीबॉल, कुश्ती, एथलेटिक्स और बैडमिंटन जैसी खेल प्रतियोगिताओं से गूंजता रहा। साथ ही शतरंज, कंप्यूटर-आधारित प्रतियोगिताएं और अनुवाद स्पर्धाएं बौद्धिक कौशल का मंच बनीं। संध्या सत्रों में एकल एवं समूह गायन, शास्त्रीय एवं आधुनिक नृत्य, संस्कृत लघु फिल्में, संपादकीय प्रस्तुतियां, रंगोली और व्लॉगिंग प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जो यह संदेश देती रहीं कि संस्कृत आज भी युवाओं के माध्यम से जीवंत है।

8 जनवरी 2026 को आयोजित समापन सत्र में प्रो. मदन मोहन झा, कुलपति, जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर; डॉ. देवानंद शुक्ला, उप-निदेशक (शैक्षणिक), केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय; प्रो. आर. जी. मुरली कृष्णा, रजिस्ट्रार, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय; प्रो. कुलदीप शर्मा तथा प्रो. लीना सक्करवाल, डीन, छात्र कल्याण, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय उपस्थित रहे। इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध श्री सीताराम वैदिक आदर्श संस्कृत महाविद्यालय ने प्राक्-शास्त्री, शास्त्री, आचार्य और विद्यावारिधि जैसे पाठ्यक्रमों के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को नैतिक, मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़कर समग्र शिक्षा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।
राष्ट्रीय गान के साथ महोत्सव का समापन हुआ और संस्कृत के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा युवाओं को आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर अग्रसर करने का संकल्प दोहराया गया।
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